धार: 15 मई को इंदौर हाईकोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद शुक्रवार 22 मई को भोजशाला में हिंदू संगठनों द्वारा महाआरती की जा रही है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरे शहर में कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। जगह-जगह बैरिकेडिंग की गई है और अतिरिक्त पिकेट पॉइंट बनाए गए हैं। सोशल मीडिया पर भी प्रशासन की कड़ी नजर बनी हुई है। नागरिकों में सुरक्षा का भाव बनाए रखने और असामाजिक तत्वों को सख्त संदेश देने के लिए गुरुवार को पुलिस ने शहर के मुख्य मार्गों पर विशाल शांति मार्च निकाला। इस दौरान जवान हाथों में तिरंगा लेकर सौहार्द और देशभक्ति का संदेश देते नजर आए।
भोज उत्सव समिति के संरक्षक अशोक जैन ने कहा कि इंदौर हाईकोर्ट के फैसले के बाद शुक्रवार को हिंदू समाज दोपहर में जुलूस निकालकर भोजशाला में महाआरती करेगा। समिति का दावा है कि 721 साल बाद ऐसा शुक्रवार आया है, जब हिंदू समाज भोजशाला में पूजा करेगा। इसे समाज के स्वाभिमान से जोड़कर देखा जा रहा है। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और अदालत के आदेशों का पालन करने की अपील की है।
15 मई 2026 से पहले भोजशाला में ASI के 2003 के आदेश लागू थे, जिसके अनुसार हर मंगलवार और बसंत पंचमी पर हिंदू समाज को पूजा की अनुमति थी, जबकि शुक्रवार को मुस्लिम समाज नमाज अदा करता था। विवाद की स्थिति तब बनती थी जब बसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ती थी। अब 22 मई को शुक्रवार के दिन हिंदू समाज द्वारा पूजा और महाआरती की जा रही है।
भोजशाला में वाणी की देवी वाग्देवी की महाआरती विशेष योग और नक्षत्र में की जाती है। ज्योतिषाचार्य आचार्य शिव मल्होत्रा के अनुसार इस दिन देवी साधना से ज्ञान, संगीत और बुद्धि प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है। प्राचीन समय में इसे मंत्र और यंत्र साधना से जोड़ा जाता था तथा संतान के उज्ज्वल भविष्य और ज्ञानार्जन के लिए विशेष पूजा की जाती थी। मान्यता है कि राजा भोज के समय भी इस अवसर पर विशेष साधना आयोजित होती थी।
धार में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए करीब 1500 जवानों का सशस्त्र बल तैनात किया गया है। इसमें स्थानीय पुलिस के अलावा रैपिड एक्शन फोर्स की दो कंपनियां और अन्य पुलिस बल शामिल हैं। संवेदनशील इलाकों और मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में लगातार गश्त की जा रही है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।
गौरतलब है कि 15 मई को इंदौर हाईकोर्ट ने अपने फैसले में विवादित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर को देवी वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर माना था। कोर्ट ने इसे संरक्षित स्मारक बताते हुए कहा था कि सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है कि ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व वाली संरचनाओं का संरक्षण किया जाए।
इससे पहले मंगलवार को भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु भोजशाला पहुंचे थे, जहां हनुमान चालीसा पाठ, यज्ञ और पूजा-अर्चना की गई थी। श्रद्धालुओं ने परिसर के बाहर आतिशबाजी कर इसे विजय उत्सव के रूप में मनाया था।


