उत्तराखंड।
सड़क सुरक्षा के खोखले दावे। पैदल यात्रियों के लिए जानलेवा बने राष्ट्रीय राजमार्ग सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की रिपोर्ट में सामने आए तथ्य। बढ़ रहीं सड़क दुर्घटनाए।
सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, सड़क हादसों में जान गंवाने वाले हर तीसरे (लगभग 30%) पैदल यात्री की मौत राष्ट्रीय राजमार्गों (NH) पर होती है।
पैदल यात्रियों के लिए उचित बुनियादी ढांचे और सुरक्षित क्रॉसिंग का अभाव इस बढ़ते संकट का मुख्य कारण है।आंकड़ों पर एक नजर:5 वर्षों में मौतें: वर्ष 2019 से 2024 के बीच सड़क हादसों में 1.8 लाख से अधिक पैदल यात्रियों की जान गई है (औसतन 30,500 प्रति वर्ष)।
राजमार्गों का हिस्सा: कुल पैदल यात्री मौतों में से 30% से 31% दुर्घटनाएं अकेले राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क पर दर्ज की गईं।
प्रमुख वाहन: पैदल यात्रियों को टक्कर मारने वाली लगभग 54% दुर्घटनाएं कारों और दोपहिया वाहनों के कारण होती हैं।
सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप: इन गंभीर आंकड़ों और पैदल चलने के मौलिक अधिकार के मद्देनजर, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से सभी सड़क उपयोगकर्ताओं के लिए सुरक्षित फुटपाथ व क्रॉसिंग सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वारा जारी नवीनतम दुर्घटना रिपोर्टों के विस्तृत विश्लेषण के अनुसार, अधिकांश राज्यों में पैदल यात्रियों के लिए अलग लेन नहीं है, जिससे वे तेज रफ्तार वाहनों की चपेट में आ जाते हैं।



