देहरादून। राजकीय शिक्षक संघ के प्रांतीय महामंत्री डॉ॰ अंकित जोशी ने वार्षिक स्थानांतरण प्रक्रिया में अनुरोध के आधार पर स्थानांतरण हेतु गंभीर रोग से संबंधित प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने की व्यवस्था से शिक्षकों के समक्ष उत्पन्न व्यावहारिक कठिनाइयों का तत्काल समाधान किए जाने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान स्थानांतरण प्रक्रिया में गंभीर रूप से रोगग्रस्त अथवा अक्षम कार्मिक के स्वयं के साथ-साथ पति/पत्नी, माता-पिता, विवाहित/विधवा महिला कार्मिक के सास-ससुर तथा 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों की गंभीर रोगग्रस्तता अथवा अक्षमता के आधार पर अनुरोध स्थानांतरण की पात्रता का प्रावधान किया गया है।
स्थानांतरण अधिनियम में गंभीर रोग के लिए “सक्षम प्राधिकारी के प्रमाण-पत्र” की विशिष्ट व्यवस्था है, जिसमें निर्धारित चिकित्सा संस्थानों के साथ राज्य मेडिकल बोर्ड, राज्य के अधिकृत मेडिकल संस्थान अथवा राज्य चिकित्सा विभाग द्वारा राज्य/जनपद स्तर पर निर्दिष्ट प्राधिकारी/समिति द्वारा जारी प्रमाण-पत्र को मान्यता दी गई है।
डॉ॰ जोशी ने कहा कि इतने सीमित समय में शिक्षकों से स्वयं के साथ-साथ दूरस्थ जनपदों अथवा अन्य स्थानों पर निवासरत माता-पिता, सास-ससुर, पति/पत्नी या बच्चों के लिए निर्धारित सक्षम चिकित्सा प्राधिकारी अथवा मेडिकल बोर्ड से प्रमाण-पत्र बनवाने की अपेक्षा व्यावहारिक रूप से अत्यंत कठिन है।
मेडिकल बोर्ड की प्रक्रिया में चिकित्सकीय अभिलेखों की जांच, विशेषज्ञ परीक्षण तथा संबंधित व्यक्ति की उपस्थिति सहित विभिन्न औपचारिकताओं में समय लगना स्वाभाविक है। ऐसे में केवल समयाभाव या प्रक्रियागत विलंब के कारण किसी पात्र शिक्षक को अनुरोध स्थानांतरण के अवसर से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कतिपय खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालयों द्वारा आवश्यक प्रमाण-पत्र उपलब्ध न होने अथवा अन्य प्रक्रियागत कारणों से स्थानांतरण आवेदन स्वीकार न किए जाने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। आवेदन को स्वीकार अथवा अस्वीकार करने संबंधी अंतिम निर्णय निर्धारित प्रक्रिया के अंतर्गत सक्षम स्थानांतरण समिति द्वारा किया जाना चाहिए। आवेदन प्राप्त करने के स्तर पर ही उसे रोक देना किसी पात्र कार्मिक को अपना प्रकरण सक्षम समिति के समक्ष रखने के अवसर से वंचित कर सकता है।
डॉ॰ जोशी ने मांग की कि विभाग गंभीर रोग/अक्षमता संबंधी सक्षम प्रमाण-पत्र प्राप्त एवं प्रस्तुत करने के लिए पर्याप्त अतिरिक्त समय प्रदान करे तथा स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करे कि किस स्तर के किस चिकित्सा प्राधिकारी, संस्थान अथवा मेडिकल बोर्ड द्वारा जारी प्रमाण-पत्र स्वीकार्य होगा। इससे विभिन्न जनपदों में अलग-अलग व्याख्या और अनावश्यक भ्रम की स्थिति समाप्त होगी।
उन्होंने दूसरी महत्वपूर्ण समस्या की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि एजुकेशन पोर्टल को डेटा संशोधन एवं अद्यतनीकरण के लिए तत्काल पुनः खोला जाना चाहिए। अनेक शिक्षकों की व्यक्तिगत एवं सेवा संबंधी सूचनाएँ, विशेषकर पारिवारिक विवरण, वैवाहिक स्थिति, आश्रितों तथा गंभीर रोग/दिव्यांगता से संबंधित विवरण वर्तमान वास्तविक स्थिति के अनुरूप अद्यतन नहीं हो सकते हैं। यदि स्थानांतरण की पात्रता पोर्टल पर उपलब्ध डेटा के आधार पर निर्धारित की जानी है, तो प्रत्येक शिक्षक को पहले अपना डेटा सही एवं अद्यतन करने का पर्याप्त अवसर मिलना आवश्यक है।
डॉ॰ जोशी ने कहा, “तकनीकी अथवा प्रक्रियागत कमी किसी पात्र शिक्षक के वैधानिक अवसर में बाधा नहीं बननी चाहिए। विभाग एजुकेशन पोर्टल को आवश्यक संशोधन एवं अद्यतनीकरण के लिए तत्काल खोले, गंभीर रोग संबंधी सक्षम चिकित्सा प्रमाण-पत्र बनवाने एवं प्रस्तुत करने के लिए पर्याप्त समय प्रदान करे तथा सभी संबंधित कार्यालयों को आवेदन स्वीकार कर सक्षम समिति के समक्ष प्रस्तुत करने के स्पष्ट निर्देश जारी करे।”
उन्होंने शिक्षा विभाग से इन विषयों पर तत्काल स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर स्थानांतरण प्रक्रिया को व्यावहारिक, एकरूप, पारदर्शी और न्यायपूर्ण बनाने की मांग की, ताकि वास्तविक रूप से गंभीर परिस्थितियों से जूझ रहे शिक्षक एवं उनके परिवार केवल समय की कमी, प्रक्रियागत अस्पष्टता अथवा पोर्टल पर पुरानी जानकारी के कारण अपने वैधानिक अवसर से वंचित न हों।



