देहरादून में कथित शिकायती पत्र को लेकर सियासत गरमा गई है, जहां भाजपा विधायक अरविंद पांडे ने साफ कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री को कोई पत्र नहीं भेजा और वायरल दस्तावेज को फर्जी बताया, जबकि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के दावे के बाद मामला और उलझ गया है; दोनों पक्षों के आमने-सामने आने से अब सवाल खड़ा हो गया है कि असल सच क्या है, और क्या इस विवाद पर कोई कानूनी कार्रवाई
कुछ दिन पहले भाजपा विधायक के चर्चित पत्र को वॉयरल करने वाले कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल को अरविंद पांडे ने झूठ साबित कर दिया।
अब राजनीतिक व सामाजिक हलकों में बहस इस मुद्दे पर केंद्रित हो गयी है। आखिर कौन सच बोल रहा है। भाजपा विधायक अरविंद पांडे या कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल!
बहरहाल, गोदियाल के उस कथित पत्र को हाथोंहाथ लेने और फिर 72 घण्टे बाद अरविंद पांडे के खंडन से शिकायती पत्र की गुत्थी उलझ गई है।
सोमवार को भाजपा प्रदेश मुख्यालय में आहूत प्रेस वार्ता में गदरपुर के भाजपा विधायक अरविंद पांडे ने कहा कि वह पत्र गलत है। और उस पत्र में लिखे बिंदु भी गलत है।
भाजपा विधायक ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री को कोई पत्र नहीं लिखा। और न ही किसी की छवि खराब की। उन्होंने कहा कि जो यशस्वी व तपस्वी होगा,उसे यही तो कहा जायेगा।
भाजपा विधायक ने कहा कि चुनाव के समय ऐसी बातें उठती रहती हैं। उन्होंने कहा कि वे भाजपा के सिपाही हैं। और संघ से जुड़े हैं।
प्रेस वार्ता में भाजपा नेत्री दीप्ति भारद्वाज ने कहा कि इसके लिए कांग्रेस नेता गणेश गोदियाल को माफी मांगनी चाहिए।
गौरतलब है कि गोदियाल की ओर से जारी पत्र अरविंद पांडे के लेटर हेड पर लिखा गया है। यह पत्र गोदियाल के पास कैसे आया। यह भी पहेली बनी हुई है।
अब अगर यह पत्र फर्जी है तो भाजपा गोदियाल पर कोई मुकदमा दर्ज करेगी ? यह भी अहम सवाल है। इस पत्र में कई आरोप लगाए गए हैं। इस पत्र के बाद भाजपा खेमे में काफी सुगबुगाहट देखी गयी। अरविंद पांडे के पत्र को गलत करार देने के बाद कांग्रेस के सामने पत्र को सही साबित करना भी एक प्रमुख चुनौती बन गयी।
