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विंग कमांडर अभिनंदन को जिनेवा समझौते के तहत छोड़ने को मजबूर होगा पाक

  • पाकिस्तान भारतीय पायलट का कुछ नहीं कर पाएगा
  • विंग कमांडर अभिनंदन को नचिकेता की तरह भारत वापस लाया जा सकता है?
देवभूमि मीडिया ब्यूरो 

देहरादून : पाकिस्तान ने दावा किया था कि उसने नियंत्रण रेखा के पार आए भारत के दो लड़ाकू विमानों को मार गिराया है और दो पायलटों को गिरफ़्तार किया है। लेकिन बाद में कहा कि उसके कब्ज़े में सिर्फ़ एक भारतीय पायलट है। जिस पायलट की बात हो रही है वो इंडियन एयरफ़ोर्स के विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान हैं। उन्होंने बुधवार सुबह फाइटर प्लेन मिग 21 से उड़ान भरी थी।  वहीं बाद में पाकिस्तान ने बुधवार को भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान को गिरफ्तार करने का दावा किया। हालांकि पाकिस्तान भारतीय पायलट का कुछ नहीं कर पाएगा क्योंकि युद्धबंदियों पर जिनेवा संधि के नियम लागू होते हैं। पाकिस्तान को भारतीय पायलट के साथ मानवीय व्यवहार करना होगा। लेकिन मीडिया में पायलट की तस्वीर रिलीज़ करना और उनके हाथ बंधे वीडियो जारी करना युद्ध की नीतियों के ख़िलाफ़ है।

जिनेवा संधि के तहत युद्धबंदियों को किसी भी तरह से डराया-धमकाया या उनका अपमान नहीं किया जा सकता। उन्हें लेकर जनता में उत्सुकता भी पैदा नहीं की जा सकती। पकड़े जाने पर युद्धबंदियों को अपना नाम, सैन्य पद और नंबर बताने का प्रावधान किया गया है। युद्धबंदियों पर या तो मुकदमा चलाया जा सकता है या युद्ध के बाद उन्हें लौटा दिया जाता है। जिनेवा संधि का आशय दूसरे विश्वयुद्ध के बाद 1949 में तैयार की गई संधियों और नियमों से है। इसका उद्देश्य युद्ध के समय मानवीय मूल्यों को बनाए रखने के लिए कानून तैयार करना था। हालांकि कुछ देशों ने जिनेवा संधि का उल्लंघन किया है।

इस बीच, वायुसेना के पूर्व अधिकारियों ने विंग कमांडर की सकुशल वापसी की उम्मीद जताई है। पूर्व एयर चीफ मार्शल अरुप राहा ने कहा है कि जंग की स्थिति में यह एक कोलैटरल डैमेज है और उम्मीद है कि पाकिस्तान युद्धबंदी नियम के उल्लंघन की हिमाकत नहीं करेगा। राहा ने कहा कि हालांकि हमारा पड़ोसी देश हर समय जिनेवा संधि का पालन नहीं करता है, लेकिन मुझे नहीं लगता कि वह इस समय कोई मूर्खता करेगा। इस समय पूरा अंतरराष्ट्रीय समुदाय हालात पर नजर बनाए हुए है। अगर पाक कुछ भी करता है तो उसे ही परेशानी उठानी पड़ेगी।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय वायुसेना के ऑपरेशन ‘सफेद सागर’ में शामिल फ्लाइट लेफ्टिनेंट नचिकेता 27 मई, 1999 को मिग-27 उड़ा रहे थे। दुश्मन पर हमले के दौरान विमान के इंजन में खराबी आ गई और आग लग गई।

ऐसे में उन्हें पैराशूट की सहायता से विमान छोड़ कर उतरना पड़ा। इस दौरान विमान क्रैश हो गया और वे पाकिस्तान की सरहद स्कर्दू क्षेत्र में सुरक्षित उतरे। जहां उन्हें पाकिस्तान की सेना ने हिरासत में लिया।

इस दौरान भारतीय वायुसेना की खुफिया जानकारियां हासिल करने के लिए उन्हें खूब प्रताड़ित किया गया लेकिन उन्होंने मुंह नहीं खोला। दबाव के चलते पाकिस्तान ने उन्हें रेडक्रास सोसायटी को सौंप दिया। घटना के एक सप्ताह बाद तीन जून को वे भारत वापस लौटे। युद्ध के दौरान किसी भारतीय पायलट के पाकिस्तान की सीमा में जाने का यह दूसरा अवसर था।

विंग कमांडर अभिनंदन हैं कौन जानिए 

21 जून, 1983 को पैदा हुए 35 वर्षीय विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई के पास सेलायुर इलाके रहने वाले हैं। साल 2004 में उनकी भारतीय वायुसेना में फ्लाइंग ऑफिसर के पद पर नियुक्ति हुई थी। अभिनंदन वर्तमान के पिता रिटायर्ड एयर मार्शल एस.वर्तमान भी इंडियन एयर फोर्स में देश की सेवा और सुरक्षा कर चुके हैं।

क्या मैं पाक सेना के कब्जे में हूं :विंग कमांडर ने पाक सेना पूछा

पाकिस्तान की तरफ से एक वीडियो जारी किया गया है। इस वीडियो में विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान के होने का दावा किया जा रहा है। जारी वीडियो में पकड़ा गया शख्स भारतीय वायुसेना की वर्दी पहने हुए है। कह रहा है कि उसका नाम विंग कमांडर अभिनंदन है और उसका सर्विस नंबर 27981 है। मैं एक फ्लाइंग पायलट हूं और मेरा धर्म हिंदू है।

अधिक जानकारी देने के नाम पर उसने बात करने से मना कर दिया और कहा, मुझे क्षमा करें, मैं आपको इतनी ही जानकारी दे सकता हूं। इसके साथ ही उसने पाकिस्तानी सेना से सवाल पूछते हुए कहा कि क्या मैं पाकिस्तानी सेना के कब्जे में हूं?
 

जेनेवा संधि से जुड़ी ये हैं प्रमुख शर्तें :-

  • इस संधि के तहत घायल सैनिक की उचित देखरेख की जानी चाहिए। 
  • उनके साथ किसी भी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए। 
  • संधि के तहत उन्हें खाना पीना और जरूरत की सभी चीजें दी जानी चाहिए। 
  • इस संधि के मुताबिक, किसी भी युद्धबंदी के साथ अमानवीय बर्ताव नहीं किया जा सकता।
  • संधि के तहत युद्धबंदी को डराया-धमकाया नहीं जा सकता है।
  • युद्धबंदी की जाति, धर्म, जन्म आदि बातों के बारे में नहीं पूछा जाता।
  • यह संधि किसी देश के सैनिक के पकड़े जाने पर लागू होती है। फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष।  
  • युद्धबंदी पर मुकदमा चलाया जा सकता है। इसके अलावा युद्ध के बाद युद्धबंदी को वापस लैटाना होता है। 
  • कोई भी देश यद्धबंदी से सिर्फ उनके नाम, सैन्य पद, नंबर और यूनिट के बारे में ही पूछ सकता है। 

https://youtu.be/gzCgeMNEPPg

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