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अब उत्तराखंड में गांवों में भी लगेगा हाउस टैक्स व यूजर चार्ज

देहरादून।

उत्तराखंड में पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से सरकार महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। इस कड़ी में नगर निकायों की भांति अब पंचायतें भी भवन कर व यूजर चार्जेज ले सकेंगी। पंचायती राज अधिनियम की नई नियमावली में इसका प्रविधान किया जा रहा है।

विभाग ने नियमावली का प्रारूप तैयार कर लिया है और इस पर जिला पंचायती राज अधिकारियों (डीपीआरओ) व जिला पंचायतों के अपर मुख्य अधिकारियों (एएमए) से सुझाव लिए जा रहे हैं। नियमावली का प्रस्ताव जल्द ही कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा।

केंद्र व राज्य वित्त आयोग की मदद पर हैं निर्भर
त्रिस्तरीय पंचायतें (ग्राम, क्षेत्र व जिला) केंद्र एवं राज्य वित्त आयोग से मिलने वाली सहायता पर ही निर्भर हैं। ऐसे में पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने के दृष्टिगत उन्हें आय के स्रोत जुटाने को प्रेरित किया जा रहा है। यद्यपि, पंचायती राज अधिनियम में प्रविधान है कि पंचायतें टैक्स वसूल सकती हैं, लेकिन नियमावली में इसे लेकर स्पष्टता नहीं है। इसे देखते हुए नई नियमावली बनाने का निर्णय लिया गया।
नई नियमावली में इन प्रविधानों पर जोर
विभाग ने नियमावली का जो प्रारूप तैयार किया है, उसके अनुसार पंचायतें अपने क्षेत्रांतर्गत व्यावसायिक व अन्य भवनों पर टैक्स वसूल सकेंगी। इसकी दरें भवनों के आकलन के आधार पर 50 से 200 रुपये तक रखने का प्रस्ताव है।
स्वच्छता, सोलर लाइट, सिंचाई, रास्तों से सबंधित कार्यों के लिए पंचायतें यूजर चार्जेज ले सकेंगी। प्राकृतिक संसाधनों के दोहन पर सेस भी लगा सकती हैं। प्रविधान किया जा रहा है कि कोई भी कर वसूलने के दृष्टिगत पंचायत प्रस्ताव पारित करने के साथ ही इसके कारण व उद्देश्य भी स्पष्ट करेगी।

शुरुआती दौर में इनसे ले सकते हैं कर
पंचायतों के अंतर्गत शुरुआती दौर में व्यावसायिक भवनों, होम स्टे, रिसार्ट और बड़े पक्के मकानों पर भवन कर लगाया जा सकता है। छोटे और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को कर में राहत दी जा सकती है।

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