नई दिल्ली।
लोकसभा ने गुरुवार को बिना किसी चर्चा के टैक्सेशन एंड अदर लॉज़ (संशोधन) विधेयक (ToLA) पारित कर दिया।
इस विधेयक का उद्देश्य पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 में संशोधन करना है, जिससे यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाए जाने का रास्ता खुल सकता है। इसके अलावा, यह विधेयक वित्त अधिनियम 2026 और आयकर अधिनियम 2025 में भी संशोधन करेगा तथा जून में जारी उस अध्यादेश को निरस्त करेगा, जिसके तहत विदेशी निवेशकों को कर छूट प्रदान की गई थी।
वित्त मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, विधेयक के तीन प्रमुख उद्देश्य हैं—विदेशी पूंजी को आकर्षित करना, मेक इन इंडिया को बढ़ावा देना और कारोबार करने में आसानी सुनिश्चित करना।
‘विदेशी पूंजी आकर्षित करने’ और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के तहत अधिकारियों ने बताया कि विदेशी कंपनियों को अक्सर यह आशंका रहती है कि भारत में या भारत के माध्यम से कारोबार करने पर उन्हें अप्रत्याशित कर देनदारी का सामना करना पड़ सकता है। विधेयक में ऐसे कई प्रावधान किए गए हैं, जो कर व्यवस्था को स्पष्ट, स्थिर और पूर्वानुमेय बनाएंगे।
इसी क्रम में एलिजिबल इन्वेस्टमेंट फंड (EIF) के लिए वैश्विक आय पर कर छूट प्राप्त करने की शर्तों की संख्या 13 से घटाकर 5 कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि इससे केवल आवश्यक शर्तें ही लागू रहेंगी, ताकि दुरुपयोग और भारतीय निवासियों द्वारा धन की राउंड-ट्रिपिंग को रोका जा सके। इससे फंड मैनेजर भारत में स्थानांतरित हो सकेंगे और विदेशी फंड को भारत में कारोबार करने वाला नहीं माना जाएगा।
डेटा सेंटर से जुड़े प्रावधानों के तहत विदेशी क्लाउड कंपनियों के लिए कर छूट की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। पहले कर छूट के लिए कई स्तरों पर सरकारी अधिसूचना और मंजूरी आवश्यक थी, लेकिन प्रस्तावित विधेयक इन मंजूरियों की अनिवार्यता समाप्त करता है। साथ ही, भारतीय डेटा सेंटर अब प्रत्यक्ष स्वामित्व के बजाय लीज़ के आधार पर भी संचालित किए जा सकेंगे।
मेक इन इंडिया के तहत प्रस्तावित प्रावधानों का उद्देश्य भारत में उत्पादन के लिए उपकरण, पुर्जे और सामग्री लाने वाली वैश्विक कंपनियों को दीर्घकालिक कर निश्चितता प्रदान करना है। उदाहरण के तौर पर, भारतीय फैक्ट्रियों को मशीनरी और टूलिंग उपलब्ध कराने वाली विदेशी कंपनियों को मिलने वाली कर छूट की अवधि पहले पांच वर्ष थी, जिसे अब 10 वर्ष बढ़ाकर कुल 15 वर्ष कर दिया गया है। यह छूट अब वित्त वर्ष 2040-41 तक प्रभावी रहेगी।
विधेयक में इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं की स्पष्ट परिभाषा भी दी गई है, जिसमें मोबाइल फोन, लैपटॉप, पर्सनल कंप्यूटर, टैबलेट, सर्वर और उनके प्रमुख पुर्जे एवं एक्सेसरीज़ शामिल हैं।
रफ डायमंड कारोबार के संबंध में अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2016 से विदेशी हीरा खनन कंपनियों को मुंबई और सूरत के विशेष क्षेत्रों में बिना कर लगाए रफ डायमंड प्रदर्शित करने की अनुमति थी। अब प्रस्तावित विधेयक के तहत विदेशी हीरा खनन कंपनियों तथा उनसे जुड़े साइट होल्डर्स, ब्रोकर्स, एग्रीगेटर्स और ऑक्शन हाउस को इन विशेष क्षेत्रों में रफ डायमंड की बिक्री से होने वाली आय पर 15 वर्षों तक पूर्ण कर छूट मिलेगी।
अधिकारियों के अनुसार, इसका उद्देश्य वैश्विक रफ डायमंड व्यापार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा भारत में लाना और इसके आसपास वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना है।



