भारत के मुख्य न्यायाधीश Surya Kant ने शनिवार को कहा कि आम लोगों को त्वरित राहत देने के लिए न्यायपालिका को भी अस्पतालों की तरह चौबीसों घंटे कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था को तेज, पारदर्शी और सुलभ बनाने के लिए तकनीक और एआई आधारित न्यायिक ढांचे को मजबूत करना समय की मांग है।
सीजेआई सूर्यकांत मध्य प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा आयोजित ‘फ्रैगमेंटेशन टू फ्यूजन: एम्पावरिंग जस्टिस वाया यूनाइटेड डिजिटल प्लेटफॉर्म इंटीग्रेशन’ विषयक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि न्यायपालिका भी अस्पतालों की तरह 24×7 आपातकालीन सेवाएं उपलब्ध कराए, ताकि आम आदमी की पीड़ा, अपेक्षाओं और जरूरतों का तुरंत समाधान हो सके।
उन्होंने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट और राज्य सरकार को न्यायिक पहुंच और कार्यक्षमता बढ़ाने वाले सॉफ्टवेयर विकसित करने पर बधाई दी। सीजेआई ने कहा कि डिजिटल सिस्टम से वादकारियों को समय पर सहायता मिलती है और उन्हें अपने मामलों की स्थिति व फैसलों की जानकारी आसानी से उपलब्ध हो पाती है।
कोविड-19 महामारी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यही वह दौर था जिसने न्यायपालिका में तकनीक के इस्तेमाल को नई दिशा दी। उन्होंने कहा कि उस समय सभी को संदेह था, लेकिन भारतीय न्यायपालिका ने अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियां निभाना जारी रखा और अदालतें बंद नहीं हुईं। किसी भी नागरिक को जरूरी राहत से वंचित नहीं किया गया।
सीजेआई ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने एक समिति का गठन किया है, जो यह अध्ययन करेगी कि लंबित मामलों के तेजी से निपटारे के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का किस प्रकार उपयोग किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि तकनीक न्यायिक समय की बर्बादी रोकने का सबसे प्रभावी माध्यम है और इससे पारदर्शिता भी बढ़ेगी। साथ ही उन्होंने जोर देकर कहा कि तकनीकी प्रगति अब केवल प्रशासनिक सुविधा नहीं रह गई है, बल्कि संविधान के अनुच्छेद 39A के तहत सस्ती और समयबद्ध न्याय व्यवस्था सुनिश्चित करने का एक संवैधानिक साधन बन चुकी है।
हालांकि, सीजेआई ने यह भी चेतावनी दी कि तकनीकी विकास समावेशी होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में अब भी कई लोग डिजिटल व्यवस्था से परिचित नहीं हैं। इसलिए तकनीकी प्रशिक्षण और डिजिटल जागरूकता में अधिक निवेश की आवश्यकता है, ताकि सभी वर्गों को न्याय तक समान पहुंच मिल सके।

