राजकीय माध्यमिक शिक्षा के समग्र सुधार हेतु डॉ. अंकित जोशी ने जारी किया विज़न दस्तावेज़
प्रांतीय महामंत्री पद हेतु नामांकन के साथ प्रस्तुत किया ‘उत्तराखण्ड माध्यमिक विद्यालयी शिक्षा एवं शिक्षक उत्कर्ष हेतु नीति-संकल्प–2026’
देहरादून। राजकीय शिक्षक संघ, उत्तराखण्ड के प्रांतीय महामंत्री पद के प्रत्याशी डॉ. अंकित जोशी ने आज अपना नामांकन पत्र दाखिल करने के उपरांत “उत्तराखण्ड माध्यमिक विद्यालयी शिक्षा एवं शिक्षक उत्कर्ष हेतु नीति-संकल्प–2026” शीर्षक से अपना विस्तृत विज़न दस्तावेज़ जारी किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि शिक्षक हितों की रक्षा, गुणवत्तापूर्ण विद्यालयी शिक्षा तथा उत्तरदायी एवं संवेदनशील प्रशासन—ये तीनों एक-दूसरे के पूरक हैं और इन्हीं आधारों पर उत्तराखण्ड की माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा दी जा सकती है।
डॉ. जोशी ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 ने विद्यालयी शिक्षा के लिए व्यापक अवसर प्रदान किए हैं, किंतु उत्तराखण्ड की माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था आज भी वर्षों से लंबित पदोन्नतियों, रिक्त प्रधानाचार्य एवं प्रधानाध्यापक पदों, वरिष्ठता विवादों, वेतन विसंगतियों, शिक्षकों की कमी, घटती छात्र संख्या, बढ़ते गैर-शैक्षणिक कार्यभार तथा प्रशासनिक जटिलताओं जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। इन समस्याओं का समाधान केवल आंशिक निर्णयों से नहीं, बल्कि स्पष्ट नीति, समयबद्ध कार्यवाही और सकारात्मक संवाद से संभव है।
अपने विज़न दस्तावेज़ में डॉ. जोशी ने शिक्षकों एवं विद्यालयी शिक्षा से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण नीति-संकल्प प्रस्तुत किए हैं। इनमें समयबद्ध पदोन्नति, प्रधानाचार्य एवं प्रधानाध्यापक के रिक्त पदों को शीघ्र भरना, वरिष्ठता विवादों का स्थायी समाधान, पारदर्शी एवं ऑनलाइन स्थानांतरण व्यवस्था, बेसिक शिक्षा से समायोजित शिक्षकों के सेवा-अधिकारों की रक्षा, वेतन विसंगतियों का समग्र निराकरण, चयन एवं प्रोन्नत वेतनमान पर वेतनवृद्धि, तथा अकादमिक–प्रशासनिक संवर्ग व्यवस्था की पुनर्समीक्षा जैसे प्रमुख विषय शामिल हैं।
उन्होंने महिला शिक्षकों के लिए बाल्य देखभाल अवकाश की प्रक्रिया को अधिक संवेदनशील एवं व्यावहारिक बनाने की भी आवश्यकता बताई।
शिक्षा की गुणवत्ता के संबंध में जारी विज़न दस्तावेज़ में राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 के प्रभावी क्रियान्वयन, सभी विषयों को समान शैक्षणिक गरिमा प्रदान करने, छात्र-शिक्षक अनुपात के अनुरूप पद सृजन, SCERT एवं DIET को पुनर्सशक्त बनाने, शिक्षक प्रशिक्षण को वास्तविक व्यावसायिक विकास से जोड़ने, विद्यालयों के संरक्षण, पर्वतीय क्षेत्रों में विद्यालयों को सुदृढ़ बनाने, घटती छात्र संख्या के वैज्ञानिक विश्लेषण तथा समय पर पाठ्यपुस्तकों एवं शैक्षणिक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया गया है।
डिजिटल सुशासन एवं प्रशासनिक सुधार के अंतर्गत उन्होंने ‘एक बार डेटा–बहु उपयोग’ (One Time Data Policy) लागू करने, विद्या समीक्षा केन्द्र को राज्य का एकीकृत शैक्षणिक डेटा एवं विश्लेषण केन्द्र बनाने, सुरक्षित डिजिटल सेवा अभिलेख विकसित करने, सेवा प्रकरणों के समयबद्ध ऑनलाइन निस्तारण, निदेशालय में सशक्त विधि प्रकोष्ठ की स्थापना तथा प्रत्येक कार्यालय में शिक्षक सुविधा काउंटर स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है।
डॉ. जोशी ने कहा कि शिक्षकों को अनावश्यक गैर-शैक्षणिक कार्यों एवं बार-बार डेटा संकलन से मुक्त किया जाना चाहिए ताकि वे अपना अधिकतम समय विद्यार्थियों के शिक्षण-अधिगम में लगा सकें। उन्होंने सभी कार्मिकों के लिए पुरानी पेंशन व्यवस्था (OPS) की बहाली का भी समर्थन किया और इसे सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार बताया।
उन्होंने कहा कि यह विज़न दस्तावेज़ केवल चुनावी घोषणा नहीं, बल्कि उत्तराखण्ड की माध्यमिक विद्यालयी शिक्षा और शिक्षक समुदाय के दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया एक रचनात्मक, व्यावहारिक, तथ्याधारित एवं परिणामोन्मुख नीति-दृष्टिपत्र है।
डॉ. जोशी ने विश्वास व्यक्त किया कि शिक्षक समाज के सहयोग से संगठन को अधिक प्रभावी, संवादशील एवं समाधानोन्मुख बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि संगठन अपने संवैधानिक दायित्वों एवं संगठनात्मक मर्यादाओं के अंतर्गत इस दृष्टिपत्र में उल्लिखित सभी नीति-संकल्पों के साथ-साथ शिक्षक हितों एवं विद्यालयी शिक्षा से जुड़े अन्य सभी व्यावहारिक, सेवा संबंधी, शैक्षणिक एवं प्रशासनिक विषयों पर सरकार, शासन, विभाग एवं संबंधित संस्थाओं के समक्ष निरंतर तथ्याधारित एवं सकारात्मक संवाद स्थापित करेगा तथा उनके न्यायोचित, समयबद्ध एवं स्थायी समाधान हेतु प्रभावी पैरवी करेगा।

