देहरादून की हवा में मौत के कण, पानी में जहर !
बढ़ते कैंसर मामलों ने बढ़ाई चिंता
कभी स्वच्छ हवा और मीठे पानी के लिए मशहूर दून घाटी आज गंभीर पर्यावरणीय संकट से जूझ रही है। प्रदूषण का असर अब सीधे लोगों की सेहत पर दिखाई देने लगा है।
देहरादून में कैंसर और श्वसन रोगों के मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी।
जनवरी 2026 में AQI 316 तक पहुंचा, हवा बेहद खराब श्रेणी में दर्ज।
PM2.5 का स्तर 329 माइक्रोग्राम/घनमीटर तक पाया गया।
रिस्पना, बिंदाल और सुसवा नदियां गंभीर प्रदूषण की चपेट में…
26 वर्षों में शहरीकरण का दायरा लगभग 8 गुना बढ़ा।
सीवेज, निर्माण और वाहनों से बढ़ रहा प्रदूषण दबाव।
विशेषज्ञों के अनुसार, वायु और जल प्रदूषण लंबे समय तक शरीर पर असर डालकर गंभीर बीमारियों के खतरे को बढ़ा सकते हैं। ऐसे में स्वच्छ हवा, साफ पानी और संतुलित जीवनशैली को अपनाना पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है।
पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक की साझा जिम्मेदारी है।



