रुद्रप्रयाग/कर्णप्रयाग। नगरासू गुरुद्वारा परिसर में निहंगों और स्थानीय लोगों के बीच विवाद तीसरे दिन भी जारी रहा। सोमवार को गुरुद्वारे की छत पर मौजूद निहंगों और पुलिस के बीच तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। एहतियात के तौर पर पुलिस और आईटीबीपी के जवानों की तैनाती पूरे परिसर में की गई है, जबकि प्रशासनिक अधिकारी लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं।
ये था मामला
16 जून 2026 को कर्णप्रयाग में निहंगों और स्थानीय लोगों के बीच विवाद हुआ था। बताया जाता है कि बद्रीनाथ हाईवे पर पार्किंग और दुकान को लेकर हुई मामूली कहासुनी ने बाद में हिंसक रूप ले लिया। दोनों पक्षों के बीच जमकर मारपीट हुई, जिसमें तलवारों और लाठियों का भी इस्तेमाल किया गया।
चारधाम यात्रा मार्ग पर हुए इस घटनाक्रम को लेकर दिल्ली और पंजाब में भी चर्चा तेज हो गई है। दिल्ली गुरुद्वारा प्रबंध कमेटी के प्रतिनिधियों ने डीजीपी से मुलाकात कर मामले में निष्पक्ष कार्रवाई की मांग उठाई है।
सोमवार सुबह छत पर मौजूद दो निहंग भोजन लेने के लिए नीचे उतरे। इस दौरान एक निहंग भोजन लेने पहुंचा, जबकि दूसरा तलवार लहराने लगा। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए भोजन लेने आए निहंग को हिरासत में ले लिया। इसके बाद दूसरा निहंग वापस छत पर चला गया। बताया जा रहा है कि इसके बाद छत पर मौजूद कुछ लोगों ने ईंट-पत्थर फेंके, जिससे मौके पर तनाव बढ़ गया। हालांकि किसी के घायल होने की सूचना नहीं है।
गुरुद्वारा परिसर, मुख्य प्रवेश द्वार और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत कर दी गई है। जानकारी के अनुसार चार निहंग अभी भी गुरुद्वारे की छत पर मौजूद हैं। प्रशासन लगातार उन्हें शांतिपूर्वक नीचे लाने के प्रयास कर रहा है।
विवाद का असर नगरासू बाजार और आसपास के क्षेत्रों में भी देखने को मिल रहा है। सामान्य दिनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु गुरुद्वारे में लंगर ग्रहण करने पहुंचते हैं, लेकिन पिछले तीन दिनों से श्रद्धालुओं की संख्या कम हुई है।
उधर, 16 जून को सिख श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के बीच हुई झड़प को लेकर कर्णप्रयाग कोतवाली में दोनों पक्षों की ओर से मुकदमे दर्ज किए गए हैं। मामले की निष्पक्ष जांच के लिए पुलिस मुख्यालय ने जांच को चमोली से हरिद्वार स्थानांतरित कर दिया है। जांच अब हरिद्वार एसएसपी की निगरानी में होगी।
इस मामले को लेकर दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी के सदस्यों ने डीजीपी दीपम सेठ से भी मुलाकात कर उचित कार्रवाई की मांग की है। वहीं शासन ने पूरे घटनाक्रम की विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। सचिव गृह शैलेश बगोली ने कहा कि शुरुआती विवाद से लेकर वर्तमान स्थिति तक सभी पहलुओं की जांच की जाएगी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड सभी धर्मों का सम्मान करने वाली देवभूमि है और मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।
गुरुद्वारा प्रबंधन समिति से जुड़े लोगों का आरोप है कि छत पर मौजूद निहंगों ने परिसर में तोड़फोड़ की है। सोलर सिस्टम और पानी की आपूर्ति व्यवस्था को नुकसान पहुंचाया गया है। इस संबंध में पुलिस को भी सूचना दी गई है।
प्रबंधन से जुड़े एक सेवादार ने बताया कि इससे पहले भी संबंधित लोगों पर अन्य स्थानों पर विवाद करने के आरोप लग चुके हैं। उनका कहना है कि गुरुद्वारे की ऊपरी मंजिल पर मौजूद लोग नीचे नहीं उतर रहे हैं और लगातार नुकसान पहुंचा रहे हैं, जिससे लाखों रुपये की क्षति हुई है। तीर्थयात्रियों के लिए तैयार किया गया भोजन भी खराब हो गया।



