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वरिष्ठ शिक्षा अधिकारी पर हमले की कड़ी निंदा, दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग

वरिष्ठ शिक्षा अधिकारी पर हमले की कड़ी निंदा, दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग

राजकीय शिक्षक संघ एससीईआरटी शाखा के पूर्व अध्यक्ष डॉ० अंकित जोशी ने निदेशक, प्रारंभिक शिक्षा, अजय नौडियाल पर हुए हमले की घोर निंदा करते हुए कहा की किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी पद पर आसीन अधिकारी अथवा कर्मचारी के साथ उनके कार्यालय परिसर में इस प्रकार की उग्र एवं हिंसात्मक घटना न केवल उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा पर प्रत्यक्ष आघात है, बल्कि शासन-प्रशासन की संस्थागत गरिमा तथा विधि-व्यवस्था के मूल सिद्धांतों को भी गंभीर रूप से आहत करती है। यदि एक वरिष्ठतम प्रशासनिक अधिकारी अपने ही कार्यालय में सुरक्षित नहीं है, तो स्वाभाविक रूप से सामान्य कार्मिकों में असुरक्षा एवं भय का वातावरण उत्पन्न होना अत्यंत चिंताजनक है।

 

यह तथ्य विशेष रूप से गंभीर है कि संबंधित अधिकारी अपने दीर्घ एवं समर्पित सेवाकाल के अंतिम चरण में, इसी माह सेवानिवृत्ति की अवस्था में, पूर्ण निष्ठा के साथ दायित्वों का निर्वहन कर रहे थे। प्रशासनिक निर्णयों पर मतभेद अथवा असहमति लोकतांत्रिक प्रणाली का स्वाभाविक अंग हो सकते हैं, तथापि उनका निराकरण केवल विधिसम्मत, संवैधानिक एवं संस्थागत प्रक्रियाओं के अंतर्गत ही किया जाना चाहिए। किसी भी प्रकार की भीड़-मानसिकता, अवैधानिक दबाव अथवा बल-प्रयोग न केवल लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रतिकूल है, बल्कि ‘विधि के शासन’ के सिद्धांत का प्रत्यक्ष उल्लंघन है।

 

शासन-प्रशासन से अपेक्षा है कि प्रकरण की गंभीरता को दृष्टिगत रखते हुए तत्काल प्रभाव से निष्पक्ष, पारदर्शी एवं समयबद्ध जांच सुनिश्चित की जाए तथा जो भी व्यक्ति दोषी पाए जाएँ, उनके विरुद्ध प्रचलित विधिक प्रावधानों एवं सेवा नियमों के अंतर्गत कठोर एवं उदाहरणात्मक कार्रवाई की जाए, जिससे भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति पर प्रभावी रोक लगाई जा सके और प्रशासनिक तंत्र में विश्वास की पुनर्स्थापना हो।

 

शिक्षा विभाग की गरिमा, प्रशासनिक शुचिता तथा विधि के शासन की रक्षा करना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

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