मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक बार फिर संवेदशीलता, संयम और सूझबूझ से कर्णप्रयाग और नगरासू विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझा दिया।
देहरादून। कर्णप्रयाग और नगरासू विवाद को धामी सरकार ने एक बार फिर संवेदनशीलता, संयम और सूझबूझ से सुलझा लिया। मामले में खुद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गंभीरता और संवेदनशीलता का परिचय देते हुए अपनी भूमिका निभाई और एक बड़े विवाद की आशंकाओं को खत्म कर दिया। हाल के एक हफ्ते में दो मौके ऐसे आए, जब हालात बेकाबू हो सकते थे लेकिन सरकार और प्रशासन की सक्रियता ने स्थितियों को सामान्य कर दिया।
विवाद के सामने आते ही मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट कर दिया था कि राज्य में कानून व्यवस्था सर्वोपरि है। एक ओर जहां उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को उपद्रवियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए, वहीं दूसरी ओर शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए धार्मिक और सामाजिक संगठनों के साथ निरंतर संवाद का मार्ग भी खुला रखा।
सरकार ने इस मामले को तूल पकड़ने से रोकने के लिए स्थानीय स्तर पर वरिष्ठ अधिकारी जनप्रतिनिधियों को सक्रिय किया ताकि किसी भी पक्ष की भावनाओं को ठेस न पहुंचे और कानून राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस पूरे विवाद में कानूनी कार्रवाई के बावजूद सरकार लगातार संवाद की स्थिति में रही।
पुलिस, प्रशासन के अफसरों ने मामले में भारी विरोधों के बावजूद बातचीत का रास्ता खुला रखा। पूरे विवाद के समाधान के लिए कई स्तर पर वार्ताएं भी हुईं। फिलहाल, स्थिति पूर्णतः सामान्य है और प्रशासन पूरी सतर्कता बरत रहा है।
व्यवस्था भी बना रहे।
मुख्यमंत्री धामी ने इस पूरे प्रकरण को अत्यंत गंभीरता से लिया। जहां जरूरत हुई, वहां अपने सिंह अफसरों की फौज भी बातचीत के लिए आगे की जिससे निहंगों से बातचीत की राह आसान हो गई। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से संयम बरतने की अपील करते हुए कहा कि उत्तराखंड शांतिप्रिय राज्य है। यहां सौहार्द बिगाड़ने वाली किसी भी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार की पारदर्शी कार्यप्रणाली और तत्परता के कारण ही यह संवेदनशील मामला बिना किसी बड़े टकराव के सुलझ गया।



