नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी को उनके ही मंत्रालय के अधीन संचालित एक सरकारी योजना के तहत खीरे की व्यावसायिक खेती के लिए लगभग 99 लाख रुपये की सब्सिडी मिली है। यह खुलासा द इंडियन एक्सप्रेस की एक जांच रिपोर्ट में किया गया है।
राजस्थान के डीडवाना-कुचामन जिले के पीह गांव स्थित उनके फार्म पर लगे एक बोर्ड पर लिखा है कि परियोजना को राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB), कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार की सहायता प्राप्त है। बोर्ड के अनुसार परियोजना की कुल लागत 1.99 करोड़ रुपये है, जिसमें 99.60 लाख रुपये (50 प्रतिशत) की सब्सिडी स्वीकृत की गई।
यह योजना मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (MIDH) के तहत संचालित होती है। इस योजना का उद्देश्य खीरा, शिमला मिर्च, टमाटर और कुछ फूलों की व्यावसायिक खेती को बढ़ावा देना है। योजना के तहत परियोजना लागत का अधिकतम 50 प्रतिशत, यानी 1 करोड़ रुपये तक की सब्सिडी दी जाती है।
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025-26 में इस योजना के तहत स्वीकृत 467 परियोजनाओं में भागीरथ चौधरी की खीरे की खेती की परियोजना भी शामिल है। उन्होंने 15 अप्रैल 2025 को आवेदन किया था और 29 अप्रैल 2025 को प्रारंभिक स्वीकृति मिल गई। इसके बाद 11 मार्च 2026 को अंतिम मंजूरी दी गई और 30 मार्च 2026 को 99.03 लाख रुपये की सब्सिडी उनके एचडीएफसी बैंक के ऋण खाते में जमा कर दी गई।
रिकॉर्ड के अनुसार परियोजना की कुल लागत 1.99 करोड़ रुपये थी, जिसमें 49.80 लाख रुपये लाभार्थी का अंशदान और 1.49 करोड़ रुपये का बैंक ऋण शामिल था।
हितों के टकराव (Conflict of Interest) पर सवाल
राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के निदेशक मंडल में केंद्रीय कृषि मंत्री पदेन अध्यक्ष (Ex-officio President) और कृषि राज्य मंत्री पदेन उपाध्यक्ष (Ex-officio Vice-President) होते हैं। हालांकि परियोजनाओं की अंतिम मंजूरी एक अलग परियोजना स्वीकृति समिति देती है, जिसमें मंत्री सीधे शामिल नहीं होते। फिर भी, अपने ही मंत्रालय की योजना से सब्सिडी लेने पर हितों के टकराव को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
द इंडियन एक्सप्रेस ने इस संबंध में मंत्री भागीरथ चौधरी से जवाब मांगा, लेकिन खबर प्रकाशित होने तक उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इससे पहले 2018 में भी भागीरथ चौधरी ने इसी योजना के तहत आवेदन किया था, लेकिन तकनीकी कारणों से वह अस्वीकार हो गया था। उसी वर्ष उनके बेटे द्वारा किया गया आवेदन भी योजना के नियमों के अनुरूप न होने के कारण खारिज कर दिया गया था।
सब्सिडी प्राप्त करने की प्रक्रिया
इस योजना के तहत लाभ पाने के लिए पहले राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन करना होता है। इसके बाद प्रारंभिक स्वीकृति, स्थल निरीक्षण और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद अंतिम मंजूरी दी जाती है। अंतिम स्वीकृति मिलने पर निर्धारित सब्सिडी की राशि लाभार्थी के बैंक ऋण खाते में जमा की जाती है।

